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कोमल विनती चाँद की

संतोख सिंह धीर

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चन्द्रमा
ND
तुम मेरी और आने लगे हो
प्यारे धरती के वासियों
स्वागतम! स्वागतम!
मेरे द्वार खुले हैं।

पर मैं बड़ी विनम्रता से
एक विनती करता हूँ
तुम अपने शुभ काम ही
अपने साथ लेकर आना
मीठे बोल, भीनी महक
सद्भावना, सदाचार

दुर्भावना, दुराचार
मुझे नहीं सुहाते
इन्हें साथ ना लेकर आना।

हजारों-लाखों सालों से
मैं अपने आपको
एक हंस की तरह
पवित्र रखता आया हूँ

न कोई यहाँ मन्दिर है
न मस्जिद, न गुरुद्वारा
तुम मेहरबानी करके
ऐसी किसी वस्तु को भी
अपने साथ ना लेकर आना
तुम अपने शुभ काम ही
अपने साथ लेकर आना।

देखो तुम मेरे लिए
कोई अपरिचित नहीं हो
तुम्हारे इर्द-गिर्द ही
हजारों लाखों वर्षों से
मैं चक्कर काटता आया हूँ

तुम बहुत उच्चकोटि के
दाता हो, वैज्ञानिक हो
तुमने वेद भी लिखे हैं
कुरान भी व बाइबल भी,
मिथहास भी सृजित किए हैं
शानदार इतिहास भी

पर तुम मुझे क्षमा करना,
एक-दूसरे की गर्दन पर
छुरी चलाने वाले भी हो
तुम, जब खेलते हो
दूध पीते बच्चों तक से
खून की होली खेलते हो
तुम, मेहरबानी करके,
इन खून की होलियों को
यहाँ साथ ना लेकर आना
तुम अपने शुभ काम ही
अपने साथ लेकर आना।

मैं भी तुम्हारी धरती पर
धरतीवासियों!
आता हूँ

पर मैं जब भी आता हूँ
सफेद जरी की तारों की भाँति
शीतल और ठंडी बरसाती
किरणें लेकर आता हूँ
तुम्हारे सारे ऋषि-मुनि
सभी संत, सभी गुरु
मेरे इस कर्तव्य की
प्रशंसा करते रहे है
मैं तो उनके महाकाव्यों में
वर्णित होता आया हूँ

इसलिए, तुम जब भी आना
मेरी तरह ही सदाचार की
ठंडी किरणें लेकर आना
अपने अग्नि-शस्त्रों को
अपने साथ ना लेकर आना।

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ND
ठीक, तुम मनुष्य हो
सर्व योनियों से ऊँचे, उत्तम
पर यह मैं इसलिए कहता हूँ
कि तुम मनुष्य होते हुए भी
काले भी हो और गोरे भी
हिन्दू, सिक्‍ख, मुसलमान, ईसाई व यहूदी भ‍ी

बल्कि अगर सच पूछो
तो तुम आजकल यही हो
मनुष्य तुम रहे ही नहीं
इसलिए, मेहरबानी करके
जब यहाँ आओ
तुम मनुष्य ही बनकर आओ
बाकी सब कुछ पीछे
अपनी धरती पर ही छोड़कर आओ ।
वैसे बड़ी खुशी से आओ
स्वागतम! स्वागतम!
मेरे द्वार खुले हैं।

पंजाबी से अनुवाद : राजेन्दर रोजी


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