मेरी हँसी हो गई कहाँ गुम
छूट गया कहाँ बचपन ?
कहाँ गए वो साथी मेरे
कॉपी,पेंसिल, खेल-खिलौने ?
मुझे मेरा बचपन लौटा दो
वो खोई खुशियाँ फिर ला दो।
पैसों का यह सौदा कैसा
बाप बेच रहा है बेटा ?
माँ तू दे अब मुझे दुलार
पुकारता है तुझे तेरा लाल।
मेरी हँसी मुझे लौटा दो
मुझे न अब और सजा दो।
रंग-बिरंगी पन्नियाँ और कचरे का ढेर
पलते हैं सपने मेरे सपने।
करता है अब मेरा भी मन
पढ़-लिखकर कुछ जाऊ बन।
मेरी किताबे मुझे लौटा दो
मेरे ख्वाब मुझे लौटा दो।
निकालों मुझे इन गलियों से
दिखाओं मुझे कोई सही राह।
दे दो मुझको प्यार की झप्पी
भर दो मेरी जिंदगी में प्यार।
मेरे सपने मुझे लौटा दो
मेरे अपने मुझे लौटा दो।
कचोटता होगा तेरा भी मन
लाल से मेरे क्यों हुई अनबन?
कभी वो मिल जाए वो राह चलते-चलते
छुपा लूँ उसे आँचल में अपने।
मेरी वो प्यारी माँ मुझे लौटा दो
मेरा वो घर-आँगन मुझे लौटा दो।