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घर का सुख

- महाराज कृष्ण संतोषी

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कहते हैं
जिन्होंने बचपन में
दरख्तों से
परिन्दों के घोंसले
गिराए होते हैं
उन्हें
घर का सुख नहीं मिलता

कितने बरसों बाद
यह जान पाया हूं
कि घर का सुख
सम्मान है
पेड़ पर घोंसले का।

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