चलो इस बारिश में समंदर के सफर पर चलें बारिश की बूंदों को लहरों पर थमते हुए देखें मछुआरों के जाल में , वक्त को उलझाकर, यादों की सीपी से खुशियों के लम्हे चुने क्षितिज पर जहां सूरज का विश्रांति स्थल है। जहां से आसमान पर चढ़ती है चांद की डोली चलो ना इस बारिश में मिट्टी की सौंधी खुशबू और अमृत घन की मिठास समंदर में घोल दें फिर रेत पर अपने कदमों के निशान अगले सफर तक छोड़ दें।