परवीन कुमार अश्क
कोठरी में दिया जला देना
बाकी सब बत्तियाँ बुझा देना
सज्दा करना सभी बुजुर्गों को
सारे बच्चों को तू दुआ देना
रात के साथ जा रहा हूँ मैं
चाँदनी आए तो बता देना
कभी अहसान न लेना बादल का
आँसुओं की झड़ी लगा देना
बाग के सूखने से पहले ही
खुशबुओं को कहीं छुपा देना
पहले उँगली पकड़ना रहबर की
फिर उसे रास्ता दिखा देना
शाम ललकाराना चराग का 'अश्क'
सुबह सूरज का मुस्करा देना।