दूज के चांद के पास टिमटिमाते तारे-सा अस्तित्व मेरा। रोशनी से उसकी प्रदीप्त होता वजूद। पर खुश हूं इस अस्तित्व से, जो जुदा नहीं चांद से। खुश्ा हूं उसकी निकटता से। और इस बात से कि शीतलता चांद की समेट लेती है तमाम उष्मा मेरे अस्तित्व की, मौका नहीं देती, कभी जलने का। चांदनी बरसाते चांद के पास अस्तित्व मुझ उग्र तारे का।