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जब छुआ तुमने...
काव्य-संसार
जब छुआ तुमने मेरे माथे की रेखाओं को मेरे गुलाबी मन के कच्चे आँगन में खुशियों के चमकीले अनार फूट-फूट गए। टूट-टूट कर बिखरती लड़ियों के एक-एक रोशन बूँदे ने मेरी देह की मुँडेर पर इतने झिलमिल दीप जलाए कि आज मैं दीवाली हो गई।