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जब वह छोटी थी

नंद चतुर्वेदी

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जब वह छोटी थी
उसने हंसते-हंसते कहा
जब हम बड़े हो जाएंगे
कही भाग जाएंगे
बादलों पर बैठकर

जैसे तितलियां तलाश करती हैं फूल
उस तरह सुगंध के दिन तलाश करते
खेलते,
एक-दूसरे को ढूंढते, पकड़ते
मैंने कुछ अनचाहे मन से कहा
लड़कियां इस तरह की बात नहीं करतीं
उदास आंखों से उसने मुझे देखा
पूछा 'क्यों'
बाद वाली उम्र में मैं
इसी प्रश्न का उत्तर ढूंढता
बूढ़ा हो गया...।

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