गुलदस्तामैं देर तक साइकिल चलाता रहूँगाऔर फिर दूर कहींएकांत जंगल में उगे फूलों को देखउतर पडूँगा। साइकिल सेएक गुलदस्ता बनाऊँगा मैंऔर ले जाकर दूँगा उस लड़की कोजिसे प्यार करता हूँ मैंमैं उससे कहूँगा-किसी दूसरे के साथ है अब तूभूल चुकी है हमारी वह मुलाकातेंइसलिए अब अपनी याद दिलाने कोले तुझे भेंट करता हूँ मैं ये साधारण फूलगुलदस्ता ले लेगी वहधुँध गहरा जाएगी उस शामउदास हो उठेगी वहआँखें झुका लेगीऔर मुस्कुराए बिना ही आगे बढ़ जाएगीमैं देर तक साइकिल खींचता रहूँगाऔर फिर एकांत जंगल मेंकहीं रुक जाऊँगा सिर्फ इतनी इच्छा है मेरीकि वह लड़कीजिसे बेहद चाहता हूँ मैंले ले मुझसे गुलदस्तावहवह अभीबिल्कुल बच्ची हैआवाज तक उसकी कच्ची हैखेलों की दुनिया में उलझीमन से एकदम सच्ची है
-चलों,चलें उस जंगल में
जहाँ गाती है कोयल
थोड़ा भीतर तक जाएँगे
जहाँ बेंच पड़ी एक पाएँगे
हो जाएँगे आँखों से ओझल
-चलों, दौड़ें उस खेत में
मैं चढ़ती हूँ पेड़ पर
तुम बैठो उस मेड़ पर
मैं सहमत-सा होता हूँ
मन पर बोझा-सा ढोता हूँ ।
मन में खुद से
मैं लड़ता हूँ
जीवन में सब-कुछ है झेला
ऊँच-नीच सोच के मरता हूँ
जब होता उसके साथ
अकेला
कभी
उदास वह होती है
और कभी इतनी गम्भीर
शायद घबरा जाए वह सुनकर
मेरी उलझन
मेरी पीर
क्यूँ घूमूँ मैं
उसके साथ
क्यूँ जाता हूँ जंगल
क्यूँ सुनता हूँ कोयल को
वो जंगल में करती मंगल
कहाँ जाएँगे उड़कर...
हम आज़ाद होंगे
पँछियों की तरह-
तुम फुसफुसाती हो
और उदास आँखों से
आकाश में उड़ते पक्षियों को देखती हो
पक्षी कैसे
उड़ते चले जाते हैं दूर तक
समुद्र के ऊपर
समुद्री झंझावातों के पार
मुझे भी
घेर लेती है उदासी
पसन्द है मुझे भी वह
पर पक्षी है वह
किसी दूसरी उड़ान का
साथ-साथ
हम भला कहाँ जाएँगे उड़कर?