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तब खबर बनती है
काव्य-संसार
डॉ. अनिल कुमार जैन
कत्ल करने या कराने पे खबर बनती हैअस्मतें लुटने, लुटाने पे खबर बनती है।कोई पूछेगा नहीं लिख लो किताबें कितनीअब किताबों को जलाने पे खबर बनती है।नाचने वाले बहुत मिलते हैं इस दुनिया मेंअब तो दुनिया को नचाने पे खबर बनती है।
बात ईमाँ की करोगे तो रहोगे गुमनामआज तो जेल में जाने पे खबर बनती है।कुछ नहीं होगा, बसाओगे जो उजड़े घर कोआग बस्ती में लगाने पे खबर बनती है।भूख से रोता है बच्चा तो उसे रोने देदूध पत्थर को पिलाने पे खबर बनती है।कितना नादाँ है 'अनिल', उसको ये मालूम नहींआग पानी में लगाने पे खबर बनती है।