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...तमन्ना रह गई अधूरी

- विलास पंडित 'मुसाफ़िर'

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कविता
ND
एक लड़की
शहर में बदहवास सी फिर रही थी
वो अनजान धनाढ्‍य दरिंदों के बीच
घिर रही थी,
उसे तलाश एक नौकरी की थी
फिक्र! भाई बहनों की ज़िंदगी की थी
शिक्षा?
मजबूरीवश पूरी न कर सकी
भाई बहनों की जिम्मेदारी के चलते
चाह के भी न मर सकी
उसके लिए जरूरी था
भाई बहनों का भरण-पोषण
यही वजह थी कि आदमी रूपी दानव
करना चाह रहा था उसका शोषण,

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ND
लाख चाहा मगर नसीब न हुई
दो वक्त की रोटी
और भूख से बेज़ार
सख्त बीमार हो गई उसकी बहन छोटी
सच के साथ जीने की,
तमन्ना रह गई अधूरी
और बाजार में ले आई
उसे उसकी मजबूरी....!

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