उस सूरत को देख लिया
लो, जन्नत को देख लिया
है पैग़ाम हवा लाई
उसके ख़त को देख लिया
तितली बैठी है गुल पर
खुशक़िस्मत को देख लिया
सब सुख-चैन गँवा बैठे
इस उल्फ़त को देख लिया
ग़ैर किया अपनों को भी
धन-दौलत को देख लिया
जाग पड़ा सोया आदम
जब औरत को देख लिया
वीरानी है आँखों में
क्या क़िस्मत को देख लिया
साभार : मसि-कागद