Hindi Poems %e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a5%82%e0%a4%b2 110052400042_1.htm

Festival Posters

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

त्रिशूल

नितिन फलटणकर

Advertiesment
हमें फॉलो करें त्रिशूल
ND
आँख में भूख थी,
और हाथ में बंदूक थी।

साथ उसके विनाश था,
और काँपती किसी की रुह थी।

वो लड़ रहा था, अपने आपसे।
न्याय के वास्ते।

न्याय की छाँव भी,
धूप से तेज थी।

छोड़ आया था वह खून के रिश्ते।
खून के लिए उसके हाथों में मौत थी।

webdunia
ND
उसे ना पता था,
वह कर रहा भूल था।
भूल भी उसको अब,
लग रही उसूल थी।

मारता-काटता वह फिर रहा अचेत-सा।
चेतना तो अब उसे लग रही त्रिशूल थी।
(यह रचना नक्सलवाद पर लिखी गई है।)

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi