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दिल से दूर...!

खराबों में रहते है

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ND


- चिन्मय ‘नाशाद’

लोग कई तरह के नकाबों में रहते है,
अच्छा बन कर खराबों में रहते है।

हर छुअन में काँटों की चुभन देते है,
मगर इनके ठिकाने गुलाबों में रहते है।

मुझको वाकिफ हकीकत से करा कर,
खुद न जाने किन ख्वाबों में रहते है।

नफरत करते है तो बेहिसाब करते है,
इश्क के मामले में हिसाबों में रहते है।

जिद में तुम जीत नहीं सकते इनसे,
ये शामिल अडि़यल नवाबों में रहते है।

इश्क का रुतबा वो क्या जानेंगे ‘नाशाद’
जो दिल से दूर किताबों में रहते है।

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