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देखकर मुझको अकेली

काव्य-संसार

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काव्यसंसार
ND
देखकर मुझको अकेली
तुम्हारा प्यार चलकर
मेरे पास आया था
मैं जो अपने नेह के सिरे जोड़ने के लिए
तलाश में थी
किसी कोमल सिरे की,
सहज ही जुड़ गई।

आज देख कर मुझे
बिलकुल अकेली
तुम्हारी याद
चलकर मेरे पास आई है
मैं, जो तुम्हारे
दूर तक चले जाने से अवगत हूँ
मैं, जो तुमसे टूटने के बाद
कई-कई सिरों से जुड़ने को
बेताब रही
आज
फिर-फिर तुमसे जुड़ने को
लौट आई हूँ।
हतप्रभ हूँ देखकर कि
तुममें कहीं कोई सिरा
बचा ही नहीं है।
इस महकती चाँदनी में देखकर
एकदम अकेली
तुम्हारी एक बात चलकर
मेरे पास आई है
और मैंने जोड़ लिया है वह सिरा
आज अपने आप से।

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