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देखो ऐसा नहीं करते

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साहित्य
-लक्ष्मी नारायण खर
NDND
भोले भाले चेहरे पे चाँद सजा के
रोशन करने के बहाने
दिलों में अंधेरा नहीं करते
देखो ऐसा नहीं करते।

मासूमियत की आड़ लेके
ऐसा नहीं करते
आँखों से हाले दिल सुनाकर
दिल की जुबाँ समझकर
नासमझ बन, किनारा नहीं करते।

झील समेटे आँखों में
अनदेखा करके
बेरुखी से यूँ गुजरा नहीं करते
तड़पता रह जाए कोई प्यासा
देखो ऐसा नहीं करते।

ख्वाबों में खुद ही आके
यूँ सताया नहीं करते
सामने आके, नजरें चुराया नहीं करते
पीता खड़ा रहे कोई आँसू
देखो ऐसा नहीं करते।

धड़कन में जब उठती हो लहरें
मझँधार में छोड़ा नहीं करते
बाहों की कश्ती में, ऐसा नहीं करते
दिल के सागर से खिलवाड़ नहीं करते।
देखो ऐसा नहीं करते।

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