पग पग चल कर देख अदल -बदल कर, पलट-पलट कर, संभल-संभल कर देख, सिक्के का पहलू चुनना तुझे है, अदल-बदल कर देख। कई हैं वो रास्ते, जो मंजिल को पहुँचे, किस रास्ते पर तुझे चलना है, पग-पग चल कर देख। कहीं धूप है, कहीं छाँव, कहीं शीत है, कहीं ताव, बच-बचकर हर मुश्किल से, राह तो होगी आसान, पर हाथ तेरे आया क्या, टोल-टोल कर देख। काँटों की राह पर लगेगा वक्त बहुत, श्रम बहुत, कष्ट बहुत, पर अलग हटकर अपनी राह बनानी है, तो थक-थक कर देख। दुर्लभ रास्ता बहुत कुछ माँगता है, पर दे जाता है वो अनुभव जो तू संजो कर देख।