वंदिता श्रीवास्तव
पानी की बूँदों का मन
कैसा है?
इस प्रश्न को सुनकर
सोच में पड़ गए
प्रकृति के पालन हार।
नन्ही बूँद ने
स्वयं उत्तर दिया
मैं हूँ सब जैसे।
सुखी मानव के लिए
हीरक अश्रु कण,
दुखी मानव के लिए,
नमक की डली,
प्यासे पंछी के लिए...
स्वाति बूँद,
फूलों के लिए
उनके रंगों की ओस बूँद।
शिशु के लिए
ममत्व का आँचल..
प्रेयसी के लिए
सजल स्पर्श
प्यासे पाहुन के लिए
शीतल जल सदृश्य,
और आपके लिए...?
चंदन का शीतल स्पर्श
ईश्वर खुश थे...
साभार : लेखिका 08