Select Your Language
फिर कब आओगी?
प्रकाश डिमरी
साँवली सूरत मोहनी मूरतस्वर्ण रथ पर बैठीपश्चिम पथ पर जातीविहंगों को हर्षातीकलरव गीत गवातीनीड़ों में लौटाती ......दूर क्षितिज के संधि पट परनीलित नभ के सुकुमार मुख परनित नटखट अल्हड बाला सीलाल गुलाल मल कर छिप जातीऔर कहीं दीपों के कोमल उर मेंमुस्कानों के पीत पुष्प खिलातीवन उपवन धरा के छोर कोअपने श्यामल आँचल में छुपाती
कहो प्रिये !!!फिर कब आओगी ???कजरारी आँखों से...मंद मंद मुस्काती ...थके पथिक को लुभाती ..आलौकिक मंगल गीत गाती ...!