फूल पत्थर पर खिलाकर देखिए
बूंद में सागर छिपाकर देखिए
कितना आसां है जहां को कोसना
खुद से खुद को ही लड़ाकर देखिए
हाथ ही अब तक मिलाते तुम रहे
दिल से अब दिल को मिलाकर देखिए
कितने खुश हो मुज़लिमों को लूटकर
अपनी दुनिया को लुटाकर देखिए
आप जो औरों से कहते हैं करो
आप भी इक मर्तबा कर देखिए
इस जहां से आप करते हैं सवाल
अपना ईमान भी जगाकर देखिए
आज तक सब की दुआ लेते रहे
आप भी कोई दुआ कर देखिए
कब तलक ओढ़े रहोगे चांदनी
थोड़ी कालिख भी लगाकर देखिए
पास जब हो हमारी मां की दुआ
तो खुदा को आजमाकर देखिए
बस करो रोना ये हर इक बात पर
दर्द को अपनी दवा कर देखिए
फैसला ये वक़्त कर देगा मियां
मत इसे यूं मुंह चुराकर देखिए
वो खुदा सुन लेगा तेरी भी दुआ
हाथ बस दिल से उठाकर देखिए
आंसुओं का मोल मोती है जनाब
आप दो बूंदें गिराकर देखिए
अब तलक समझा मुक़द्दर को खुदा
अब तो ‘रोहित’ खून जलाकर देखिए।