Hindi Poems %e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%b2 %e0%a4%97%e0%a4%8f 111040600070_1.htm

Biodata Maker

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

भूल गए!

दिनेश सिंह

Advertiesment
हमें फॉलो करें दिनेश सिंह
जाने कैसे हुआ
कि प्रिय की पाती पढ़ना भूल गए
दाएँ-बाएँ की भगदड़ में
आगे बढ़ना भूल गए

नित फैशन की
नए चलन की
रोपी फसल अकूते धन की
वैभव की खेती-बारी में
मन को गढ़ना भूल गए

ना मुड़ने की
ना जुड़ने की
जिद ऊपर-ऊपर उड़ने की
ऊँचाई की चिंताओं में
सीढ़ी चढ़ना भूल गए

हम ही हम हैं
किससे कम हैं
सूर्य-चन्द्र अपने परचम हैं
फूटी ढोल बजाते रहते
फिर से मढ़ना भूल गए।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi