वो रंग जो मैंने कुछ दिन पहले रख दिया थामाँग में तु्म्हारीएक अँगूठी की तली से उठाकरऔर वो जोपसीज गया थाजब तुम रोई थीलिपटकर सबसेऔर बिखेर दिया था तुमने जिसेमाथे पर चारों तरफवो आज फिर मुझेअपनी कमीज के कॉलर परदिखा और फिर दिखा अपने गले की जंजीर केएक फुन्दे मेंऔर अँगूठी में भी जिसमें उसे लेकरपहली बार भरा था मैंने- मुझे याद आया वो क्षण जब लिवा लाया था तुम्हेंअलस्सुबह विदा वाली लाल साड़ी में लिपटी तुमऔर फिरतु्म्हारा शरीर जोविलग होकर मूल से अपनेआ सिमटा था मुझमें
देह मेरी रंग के
उसी रंग में
जो कुछ देर पहले
छुआ था मैंने
तुम्हें पा लेने को
और जो गहरा रहा था
और, और .....और !
साभार : वागर्थ