Hindi Poems %e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%82 %e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a4%be %e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a4%a4%e0%a4%be %e0%a4%b9%e0%a5%82%e0%a4%81 109021800072_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

मैं बनना चाहता हूँ

Advertiesment
कविता
- मोहन वर्म
NDND
अगर बन सकूँ तो
बनना चाहता हूँ

नीम का पेड़।

जिसकी पत्तियाँ बावजूद
तमाम कडुवाहट के करती हैं
भीतर का रक्त शुद्ध।

अगर बन सकूँ तो
बनना चाहता हूँ
सुई किसी चिकित्सक की
जो बावजूद क्षणिक दर्द के
करती है काया को निरोगी।

अगर बन सकूँ तो
बनना चाहता हूँ
पासंगरहित तराजू जो
तौल सके ठीक-ठीक
और कर सके दिए गए मूल्य का
सही हक अदा।

अगर बन सकूँ
तो बनना चाहता हूँ
मुस्कुराहट किसी मासूम की

जो बदलते माहौल में भी
जिलाए है एक खुशनुमा उम्मीद।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi