निष्कपट, निष्पाप प्रेम की परिभाषा तुम बता गए, जाने-अनजाने द्वार पर मन के तुम कब आ गए! पहली बार भी अजनबी तुम, कभी नहीं मालूम हुए, सदियों से जो निभा रहे थे, रिश्ते सम्मुख आ गए। नजरों ने नजरों को छू लिया, कहने की कुछ बात नहीं थी, मौन प्रेम की भाषा होती नजरों से तुम सिखा गए।