पतझड़ के पत्तेजो जमीं पे गिरे हैंचमकते-दमकतेसुनहरे हैं।पत्ते जो पेड़ परअब भी लगे हैंवो मेरे दोस्त,सुन, हरे हैंमौसम से सीखोराज़ इसमें बड़ा हैजो जड़ से जुड़ा हैवो अब भी खड़ा हैरंग जिसने बदलावो कूढ़े में पड़ा है
घमंड से फ़ूला
घना कोहरा
सोचता है देगा
सूरज को हरा
हो जाता है भस्म
मिट जाता है खुद
सूरज की गर्मी से
हार जाता है युद्ध
मौसम से सीखो
राज़ इसमें बड़ा है
घमंड से भरा
जिसका घड़ा है
कुदरत ने उसे
तमाचा जड़ा है