FILE वसंत तुमसे सचमुच अलग नहीं है।दूर कहीं कुहुक रही है कोयल,मुझे ऐसा लग रहा है तुम आंगन में खड़ीं अपनी मीठी आवाज में मुझे पुकार रही हो।फाल्गुनी हवाएं मुझे छूकर जा रही हैं ठीक वैसे ही,जैसे तुम प्यार से मुझे छूकर दूर कर देती हो,युगों की थकान। आम्र वृक्ष...