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वह उड़ना चाहती है

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भारती पंडित

NDND
उसे दो उम्मीदों का अनंत आसमान
वह उड़ना चाहती है,

उसे दो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
वह बोलना चाहती है,

उसे दो विश्वास का संबल
वह कुछ कर गुजरना चाहती है,

उसे झाँकने दो अन्तर्मन में
वह स्वयं से साक्षात्कार करना चाहती है,

उसे लहराने दो सपनों के परचम
क्योंकि वह माँ, बेटी या पत्नी नहीं,
एक पहचाना नाम बनना चाहती है।

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