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शब्द लहरों की तरह

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हिन्दी कविता
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शब्द लहरों की तरह
हुड़दंग मचाए
झाग में नमक संभाले
दौड़ लगाते हैं
सिर के बालों की तरह बिखरे दिखते
जड़ों से मजबूत बने रहते हैं
भीतर हंसते फटते
जख्मी करते रहते हैं
मैं हड्डियों को बचाती रहती हूं कहीं
उनसे चिपके न रह जाएं
सिर की जुओं की तरह चुन-चुन कर
उन्हें बाहर निकालती रहती हूं।

- चम्पा वैद

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