कोशिश करता हूँ किसी भी अभिव्यक्ति से किसी को भी ठेस न पहुँचेजिस पेशे में हूँ वहाँ किसी गुनाह की तरह
कठिन शब्दों को छाँट देता हूँकठिन वाक्यों को बना देता हूँ सरलजबकि हालात दिन-ब-दिन और कठिन होते जातेमैं समय का संपादन नहीं कर पाताकितना खुशकिस्मत हूँ
एक जीवन में कितनी स्त्रियों का प्रेम मिलाकितने मित्रों कितने बच्चों काप्रेम के हर पल से जन्म लेता हूँपल-बढ़कर प्रेम की ही किसी आदिम गुफा में
छिप जाता हूँ धीरे-धीरे मृत होता
कंधे झिड़क कहता हूँ खुद से
एक जीवन और चाहिए
पाया हुआ प्रेम लौटाने को
घृणा की वर्तनी में
कोई गलती नहीं होती मुझसे
नफरत में नुक्ता लगाना कभी नहीं भूलता।
साभार : वागर्थ