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सारे बंधन छोड़ के देखो
- रोहित जैन
इक दिन खुद को तोड़ के देखोसारे बंधन छोड़ के देखोजिनकी राह तका करते होखुद ही उन तक दौड़ के देखोअलग- अलग तुम क्यों रहते होदिल से दिल को जोड़ के देखोइन राहों से बचते हो तुमइन राहों को मोड़ के देखोसब गम इक पल में भागेंगेमाँ की बाहें ओढ़ के देखोकितना कुछ बेकार भरा हैदिल की गागर फोड़ के देखोसब के ईमाँ सोए से हैंदुनिया को झकझोर के देखोतुम्हे शिकायत है दुनिया से‘रोहित’ ज़हन निचोड़ के देखो।