मुँदे से कोंपल-मन परजब पड़ी प्रेम की बूँद, पुलकित हुआ मनबनकर युवा पुष्प...छूने को नया आकाशउठाता सिर बार-बारजब ली इसने अंगड़ाईसावन की घटा छाई...
बरसी बन स्नेह अपार
छटा में भर गया प्यार,
पुष्प सा खिला मेरा मन
भीग रहा बार-बार...
ऐ मेघ...बरसा दे आज
अपना प्रेम अपार
पड़ने दे मुझपर
इस बार सावन की
प्रेममयी पहली फुहार...