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सिर्फ एक औरत

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सिर्फ एक औरत शैफाली शर्मा
- शैफाली शर्मा

SubratoND
तुम सच के धरातल पर खड़े
किसी महात्मा की मूरत की तर
जिसको लोग नमस्कार कर आगे बढ़ जाते है
एक और झूठ बोलने के लिए,
मैं कल्पना के आसमान में उड़ती अदनी-सी चिड़िया।

तुम सच के विकृत रूप क
निडरता से स्वीकार करने वाल
रोशनी से भरपूर दि
मैं सपने के सच हो जाने के डर स
नींद से जाग जाने वाली अँधियारी रात।

तुम किसी बच्चे की तर
निर्मल, निश्छल
और मैं उम्र के जंगलों में भटकता जीवन.......

तुम एक बार में सिर्फ एक औरत को
प्यार करने वाले आदम
और मैं आदमी को कभी माँग में,
कभी दिल में,
तो कभी कोख में रखने वाली एक औरत
सिर्फ एक औरत....

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