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आँखें खुल गई

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राजश्री कासलीवाल

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ईशा की शादी में रमन भी मौजूद था। जो ईशा को दुल्हन के रूप में देखते ही उसका कायल हो गया। उसके बाद रमन का कभी-कभार ईशा के घर आना-जाना लगा ही रहता था। रमन उनके घर के पास में ही रहता था। इसलिए घरवालों ने भी कभी किसी भी दृष्‍टि से इस बात को गलत नहीं लिया।

रमन हमेशा ही ईशा के करीब ही रहता था। कुछेक सालों बाद रमन के माता-पिता ने वहाँ से कहीं दूर अपना घर खरीद लिया। रमन का फिर भी वहीं हाल रहा। कुछ समय बाद रमन की शादी हो गई और वह अपने नौकरी के सिलसिले में बाहर चला गया।

कई सालों बाद उसी गाँव में वह अपनी बीवी-बच्चों के साथ लौट आया। पहले की तरह उसे जब भी समय मिलता वह बेहिचक ईशा के घर चला जाता। उसके इस अपनत्व को देखते हुए ईशा फिर उसे पसंद करने लगी। लेकिन एक दिन जब रमन का ईशा को लेकर अपनी बीवी से झगड़ा हो गया तो रमन ने ईशा के घर आकर उसे बहुत भला-बुरा कहा और उस पर चाकू तान लिया।

रमन का यह रूप देखकर ईशा की आँखें खुल गई। वह रमन को क्या समझती थी और वह क्या निकला...। अगर बीवी के प्रति इतना प्यार था तो उसकी जिंदगी में क्यों आया?

आज उसे अहसास हुआ कि पुरुष कभी भी किसी का सगा नहीं होता।

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