Hindi Stories %e0%a4%87%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be 107042700043_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

इशारा

Advertiesment
सास ससुर
- नीता श्रीवास्तव

गलत वक्त पर पहुँची थी मैं। व्यस्त थीं वे। कई चीजों को उठाकर आलमारी-ट्रंक में बंद कर रही थीं। साथ ही फ्रिज की चाबी भी ढूँढ रही थीं। उथल-पुथल मची थी घर में। उठाधरी... तालाकूँची... बदहवासी का नजारा...?

मालूम हुआ - 'सास-ससुर आ रहे हैं, पूरे महीने भर के लिए... उसी की तैयारी में लगी हूँ। उन लोगों के आने पर तो दोनों की तीमारदारी... खातिरदारी... ताबेदारी और चौकीदारी में ही दिन-रात खटना पड़ेगा... आप तो पड़ोस में हैं... खुद देखेंगी।'

वैसे आपके पहले हमारे पड़ोस में प्रभाती रहती थी न... वह तो मुझे मोहल्ले भर में बदनाम करके गई है कि मैं सास-ससुर को कैदियों-सा रखती हूँ। रोज मेरी सास को न्योता दे-देकर बुलाती थी और घर की बातें पूछती थी, कुरेद-कुरेद कर... और सास को पिरोती थी मेरा रहन-सहन... उठना-बैठना। वह तो भला हुआ टली।

आप खुद देखेंगी मेरे जैसी सेवा... खिलाना-पिलाना कोई बहू करती नहीं होगी, अपने सास-ससुर की... पर मेरे हाथ में जस है ही नहीं... बुरी-की-बुरी।

बतियाते हुए फ्रिज की चाबी ढूँढना जारी था उनका... 'खैर... अब आपके पड़ोस में आ जाने से मेरा वो टेंशन तो दूर हो गया। आपके पास कहाँ है फुरसत, मेरी सास के संग धूप में बैठक जमाने की...' कहकर चुप हो गईं वे।

स्पष्टतः उनका इशारा यही था कि पड़ोसी होने के बावजूद मैं उनकी सास से परिचय न बढ़ाऊँ। हद है... इशारों में ही अपना रास्ता साफ कर लिया। मुझे भी जवाब देना पड़ा- 'फुरसत...? मेरे पास क्या... किसी के पास नहीं है। आपको ही देखिए... पूज्य सास-ससुर के स्वागत की तैयारी में व्यस्त हैं... दर्जनों काम हैं... दबाना-छुपाना- समेटना और उस पर भारी काम... फ्रिज की चाबी ढूँढना। आखिर सास-ससुर आ रहे हैं फ्रिज लॉक करके रखना जरूरी है ना...' कहकर चुप हो गई मैं..... उनके इशारे का जवाब इशारे में देकर मैंने भी जाहिर कर दिया कि वे कितने पानी में हैं।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi