Hindi Stories %e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80 %e0%a4%95%e0%a5%80 %e0%a4%9f%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a5%80 109092700065_1.htm

Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

पानी की टंकी

लघुकथा

Advertiesment
पानी की टंकी
ND
नवागत प्रधान पाठिका ने आज ही अपना पदभार ग्रहण किया। वे अपने कक्ष की खिड़की से विद्यालय का सरसरी तौर पर मुआयना कर रही थी, तभी उनकी निगाहें विद्यालय परिसर में बनी पानी की टंकी पर ठहर गईं जिस पर बड़े-बड़े शब्दों में लिखा था, 'पीने का स्वच्छ जल' परंतु इस टंकी के चारों ओर जमा काई यह बतला रही थी कि महीनों से टंकी की सफाई तक नहीं हुई है। विद्यालय के छोटे-छोटे बालक-बालिकाएँ पानी पीने के लिए वहीं धक्का-मुक्की कर रहे थे। उन्हें इस बात से कोई सरोकार नहीं कि टंकी का पानी कैसा है? उन्हें तो जब भी प्यास लगती वे इसी टंकी का पानी पी लेते थे।

'मैडम, पानी' अचानक इस स्वर ने उनका ध्यान भंग किया। देखा तो भृत्य ट्रे में पानी का गिलास लिए खड़ा था।

'कहाँ से लाए हो यह पानी?' प्रधान पाठिका ने सहज ही प्रश्न किया।

'मटके से लाया हूँ। सभी स्टाफ के लिए पानी मैं ही भरता हूँ और ये मटके मैं रोज धोकर भरता हूँ। एकदम स्वच्छ पानी है', भृत्य ने भी उसी सहजता से उत्तर दिया।

'अच्छा, सामने जो पानी की टंकी दिखाई दे रही है वह पिछली बार कब धुली थी?'

'यह तो याद नहीं, परंतु काफी समय हो गया है उसे धुलवाने में।'

'आज के बाद पूरा स्टाफ उसी टंकी का पानी पिएगा, जिसमें मैं भी शामिल हूँ। जब विद्यालय के छोटे-छोटे विद्यार्थी उस टंकी का पानी पी सकते हैं तो हम सभी क्यों नहीं? और आज के बाद तुम सभी को उसी टंकी का पानी पिलाओगे' , मैडम ने कड़े स्वर में कहा।

दूसरे ही दिन से शिक्षकों की देखरेख में पानी की टंकी की मरम्मत एवं सफाई का कार्य आरंभ हो चुका था।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi