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बिगड़ने की उम्र

लघुकथा

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साहित्य
विनीता तिवारी
WDWD
रात को पड़ोसी पिंगले जी के घर में कुहराम मचा था, सबेरे काम वाली बाई बता रही थी। वे लोग कल शर्मा जी के यहाँ पार्टी में गए थे। पिंगले जी मिसेज शर्मा से हँस-हँस कर बात कर रहे थे। यह मिसेज पिंगले को नागवार लगा। वह कई बार बोले - जरा मेरी उम्र तो देखो, क्या यह तुम्हें बिगड़ने की उम्र लगती है। लेकिन मिसेज पिंगले एक ही रट लगा रही थी बिगड़ने की भला कोई उम्र होती है।

पिंगले जी बस इतना ही बोले कि जब मैं कह रहा था मिनी का दाखिला बाहर मत करवाओ तब तुम कह रही थीं - अब चिंता मत करो वह 18 वर्ष की हो गई है बिगड़ने की उम्र तो निकल गई है। कम से कम अपने कहे शब्दों से तो मत मुकरो।

साभार : लेखिका 08

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