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World Environment Day 2026: वृक्ष से जुड़े हिंदू व्रत एवं त्योहार

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Neem, Banyan, and Peepal trees in the picture.
हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में वृक्षों को देवतुल्य माना गया है, इसलिए कई ऐसे त्योहार और व्रत हैं जो पूरी तरह से वृक्षों की पूजा, उनके संरक्षण और प्रकृति के प्रति आभार जताने के लिए समर्पित हैं। मुख्य रूप से वृक्षों से जुड़े प्रमुख त्योहार और व्रत निम्नलिखित हैं।
 

1. वट सावित्री व्रत (बरगद/वट वृक्ष)

यह त्योहार पूरी तरह से बरगद (वट) के वृक्ष को समर्पित है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या (और कुछ क्षेत्रों में पूर्णिमा) को महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं, उसमें जल अर्पित करती हैं और उसके चारों ओर सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास होता है और इसकी आयु बहुत लंबी होती है।
 

2. आंवला नवमी या अक्षय नवमी (आंवला वृक्ष)

कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी मनाई जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है और इसके नीचे बैठकर भोजन बनाने व ग्रहण करने की परंपरा है। आयुर्वेद में आंवले को आरोग्य बढ़ाने वाला 'सुपरफूड' माना गया है, और धार्मिक दृष्टि से इस दिन आंवले के संरक्षण का संकल्प लिया जाता है।
 

3. तुलसी विवाह (तुलसी का पौधा)

कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवोत्थान एकादशी) के दिन तुलसी के पौधे का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु जी) के साथ अत्यंत धूमधाम से कराया जाता है। तुलसी को सभी वनस्पतियों का प्रतिनिधि और औषधियों की रानी माना गया है। यह त्योहार घर-घर में तुलसी के रोपण और उसकी देखरेख के महत्व को रेखांकित करता है।
 

4. विजयादशमी / दशहरा (शमी वृक्ष)

दशहरे के दिन शमी के वृक्ष (जिसे खिजड़े का पेड़ भी कहा जाता है) की विशेष पूजा करने की प्राचीन परंपरा है। महाभारत काल में पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में ही छुपाए थे। ज्योतिष और वनस्पति शास्त्र के अनुसार, शमी का वृक्ष पर्यावरण और कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यह आने वाले मौसम का पूर्वानुमान लगाने में भी सहायक माना जाता है।
 

5. हरियाली तीज (प्रकृति और वनस्पति)

श्रावण (सावन) मास में मनाई जाने वाली हरियाली तीज सीधे तौर पर प्रकृति के हरे-भरे स्वरूप और वनस्पतियों के स्वागत का त्योहार है। इस दिन बागों में पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं और लोक गीतों के माध्यम से वृक्षों व प्रकृति की सुंदरता का उत्सव मनाया जाता है।
 

6. अश्वत्थोपनयन व्रत (पीपल वृक्ष पूजा): 

जब भी अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने और जल चढ़ाने का विशेष विधान है। पीपल को 'प्राणवायु (ऑक्सीजन) का भंडार' कहा जाता है, इसलिए इसकी पूजा का सीधा संबंध दीर्घायु और आरोग्य से जुड़ा है। हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और फलदायी अनुष्ठान है, जिसमें पीपल के वृक्ष को साक्षात त्रिदेव का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से आरोग्य, दीर्घायु, सौभाग्य और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके अलावा सावन महीने में पड़ने वाले शनिवार के दिन 'अश्वत्थ मारुति पूजन' किया जाता है।
 
विशेष: दक्षिण भारत में करगा उत्सव और जनजातीय समाजों में सरहुल जैसे त्योहार मनाए जाते हैं, जो पूरी तरह से पेड़ों, जंगलों और प्रकृति की पूजा पर आधारित हैं।

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