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दंड नायक शनिदेव

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दंड नायक शनिदेव
नीलांजनं समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्‌।
छायामार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम्‌
WD
पुराण कहते हैं कि शनि को परमशक्ति परमपिता परमात्मा ने तीनों लोक का न्यायाधीश नियुक्त किया है। शनिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश को भी उनके किए की सजा देते हैं और ब्रह्मांड में स्थित तमाम अन्यों को भी शनि के कोप का शिकार होना पड़ता है।

पुराण कहते हैं कि यदि कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय करता है तो वह शनि की वक्र दृष्टि से बच नहीं सकता। शराब पीने वाले, माँस खाने वाले, ब्याज लेने वाले, परस्त्री के साथ व्यभिचार करने वाले और ताकत के बल पर किसी के साथ अन्याय करने वाले का शनिदेव 100 जन्मों तक पीछा करते हैं।

सूर्य से उक्त ग्रह की उत्पत्ति मानी जाती है, इसीलिए शनि को सूर्य का पुत्र भी माना जाता है। यदि हम ग्रह की बात करें तो शनि ग्रह के चारों ओर जो वलय है वह दूर से नीला नजर आता है। वैज्ञानिक इस वलय को लेकर अभी भी अचंभित हैं कि आखिर ये वलय किस ‍चीज के बने हैं।

देवता या ग्रह : यह विवाद का विषय हो सकता है कि शनि एक देवता हैं या एक ग्रह। हनुमानजी के काल में शनि नाम के एक व्यक्ति भी हुए हैं जिनके चरित्र के आधार पर ही शनिग्रह के चरित्र को माना जाता है। उसी तरह जिस तरह हनुमानजी को मंगलग्रह का देवता नियुक्त किया गया है। फिर भी यह पूरी तरह से शोध का विषय है कि ग्रह और ग्रहों से संबंधित देवताओं का ग्रहों से क्या संबंध है। जो भी हो हिंदुओं के लिए दोनों ही पूजनीय हैं।

पुराणों के अनुसार : इनके सिर पर स्वर्ण मुकुट, गले में माला तथा शरीर पर नीले रंग के वस्त्र और इंद्रनीलमणि के समान। यह गिद्ध पर सवार रहते हैं। इनके हाथों में धनुष, बाण, त्रिशूल रहते हैं। शनि को सूर्य का पुत्र माना जाता है। उनकी बहन का नाम देवी यमुना और माता का नाम छाया (सवर्णा) है।

ज्योतिष अनुसार : ज्योतिषियों अनुसार शनि मकर और कुम्भ राशि के स्वामी हैं तथा इनकी महादशा 19 वर्ष की होती है। यह धरती और शरीर में जहाँ भी तेल और लौह तत्व है उस पर राज करते हैं। शरीर में दाँत, बाल और हड्डियों की मजबूत या कमजोरी का कारण यही हैं।

शनिदेव से सभी डरते हैं क्योंकि ज्योतिष अनुसार शनि की साढ़ेसाती और ढय्या के फेर में फँसे व्यक्ति की जिंदगी में तूफान खड़े हो जाते हैं।

खगोल विज्ञान अनुसार : खगोल विज्ञान के अनुसार शनि का व्यास 120500 किमी, 10 किमी प्रति सेकंड की औसत गति से यह सूर्य से औसतन डेढ़ अरब किमी की दूरी पर रहकर यह ग्रह 29 वर्षों में सूर्य का चक्कर पूरा करता है। गुरु शक्ति पृथ्‍वी से 95 गुना अधिक और आकार में बृहस्पति के बाद इसी का नंबर आता है। अपनी धुरी पर घूमने में यह ग्रह नौ घंटे लगाता है। शनि धरातल का तापमान 240 फेरनहाइट है। शनि के चारों ओर सात वलय हैं, शनि के 15 चन्द्रमा हैं जिनका प्रत्येक का व्यास पृथ्वी से काफी अधिक है।

शनि के प्रसिद्ध मंदिर : महाराष्ट्र का शिंगणापुर गाँव का शनि मंदिर। मध्यप्रदेश के ग्वालियर के पास शनिश्चरा मंदिर। उत्तरप्रदेश के कोशी के पास कौकिला वन में सिद्ध शनि देव का मंदिर।

शनि ग्रह को जानें

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