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पंचमी के दिन मनेगी होली

उमरेठ में होगी होली की मस्ती

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रंगपंचमी
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रंगपंचमी का दिन रंग खेलने का दिन है। इस दिन हर कोई अपने ओढे़ लबादे से बाहर निकलकर मस्ती में डूब जाना चाहता है। रंगपंचमी पर चारों ओर होली की उमंग होगी। आमतौर पर होलिका दहन के दूसरे दिन रंग खेला जाता है। लेकिन होली पांच दिनों बाद पंचमी को होगी।

रंगपंचमी के दिन पूरा गांव उमरेठ होली की मस्ती में डूबेगा। रंगपंचमी को ही होली क्यों इसके पीछे कोई पुख्ता कारण न होकर व्यवस्थाओं के तहत पंरपरा बन गई है। उमरेठ परासिया से बारह किलोमीटर दूर का गांव है।

होली की अपनी परंपरा के चलते इस गांव को प्रसिद्घि मिली है। धुरेंडी पर जब पूरा इलाका होली की मस्ती में डूबा रहता है उमरेठ शांत रहता है। यहां इस दिन न तो हुरियारों की टोलियां गांव में घूमती है न किसी तरह का शोर शराबा होता है। रंगपंचमी को पूरा गांव तरबतर हो जाता है।

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उमरेठ में इसको लेकर लोग अलग अलग बातें करते है। सबसे ज्यादा लोग कहते है कि उमरेठ में आदिवासियों का प्रसिद्घ मेघनाद मेला लगता है। इस मेले में दूर दूर से लोग आते है। बाहर से आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो इसलिए यहां धुरेंडी के दिन रंग नहीं खेला जाता। इससे व्यापारियों को भी अपना काम करने में आसानी होती है।

यह परंपरा धीरे धीरे रिवाज बन गई। अब यहां रंगपंचमी को ही होली होती है। क्या बच्चे, क्या जवान, क्या बूढ़े सभी इस होली में मस्त रहेंगे। जिसमें महिला भी पीछे नहीं रहेंगी।

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