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शयन कक्ष और दिशा

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वास्तु
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उत्तर दिशा जल तत्व की प्रतीक है। इसके स्वामी कुबेर हैं। यह दिशा स्त्रियों के लिए अशुभ तथा अनिष्टकारी होती है। इस दिशा में घर की स्त्रियों के लिए रहने की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

पूर्वी दिशा अग्नि तत्व का प्रतीक है। इसके अधिपति इंद्रदेव हैं। यह दिशा पुरूषों के शयन तथा अध्ययन आदि के लिए श्रेष्ठ है।

पश्चिमी दिशा वायु तत्व की प्रतीक है। इसके अधिपति देव वरूण हैं। यह दिशा पुरूषों के लिए बहुत ही अशुभ तथा अनिष्टकारी होती है। इस दिशा में पुरूषों को वास नहीं करना चाहिए।

दक्षिणी दिशा पृथ्वी का प्रतीक है। इसके अधिपति यमदेव हैं। यह दिशा स्त्रियों के लिए अत्यंत अशुभ तथा अनिष्टकारी होती है।

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