Poem on 15th August ALSO READ: 15 अगस्त, स्वतंत्रता दिवस पर कविता : इसी देश में भारत मां का शीश हिमालय चरण हैं हिन्द महासागर, मातुश्री के हृदय देश में बहती गंगा हर-हर-हर। अगल-बगल माता के दोनों लहराते हैं रत्नाकर, पूरब में बंगाल की खाड़ी पश्चिम रहे अरब सागर। ...