किसी भी अन्य कुंभ स्थल में आस्था का ऐसा विशाल, सर्वव्यापी, अनंत विराट दर्शन नहीं होता, जो निरंतर प्रेरणास्पद हो, और न गंगा जैसी परोक्ष-नदी की कल्पना की गई है। त्रिवेणी 'मृत' और 'अमृत' दोनों तत्वों के समीकरण से उत्पन्न ऐसी धारणा है जो मृत्यु पर मानसिक रूप से विजय प्राप्त करके जीवन में व्याप्त अमृत-तत्व को सर्वसुलभ बनाने का संकल्प करती है। इसमें इतिहास और पुराण दोनों में सहायक होते हैं।