Publish Date: Wed, 26 Feb 2025 (14:02 IST)
Updated Date: Wed, 26 Feb 2025 (14:12 IST)
इंदौर IIT ने एक रिसर्च की है। जिसमें सामने आया है कि अगर कंक्रीट सामग्री में खाद्य अपशिष्ट मिला दिया जाए निर्माण की ताकत बढ सकती है। बता दें कि दुनियाभर में खाद्य अपशिष्ट का उचित निपटारा नहीं होने से बढ़ता कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। ऐसे में इंदौर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के अनुसंधानकर्ताओं ने खाद्य अपशिष्ट के इस्तेमाल का अनूठा तरीका खोज निकाला है। रिसर्च में सामने आया है कि अगर कंक्रीट सामग्री में खाद्य अपशिष्ट मिला दिया जाए तो न सिर्फ निर्माण की ताकत बढेगी बल्कि वो टिकाऊ भी होगा।
उत्सर्जन में भी कटौती : अधिकारियों के मुताबिक आईआईटी इंदौर की इस रिसर्च में कहा गया है कि खाद्य अपशिष्ट के साथ एक गैर रोगजनक बैक्टीरिया को मिलाकर इसे कंक्रीट में मिला देने से निर्माण की ताकत दोगुनी हो सकती है और कार्बन उत्सर्जन में भी कटौती की जा सकती है।
रिसर्च टीम में शामिल प्रोफेसर संदीप चौधरी ने बताया कि हमने खराब फलों के गूदे और इनके छिलकों जैसे खाद्य अपशिष्ट में एक गैर रोगजनक बैक्टीरिया मिलाया और इसे कंक्रीट में मिश्रित किया। इससे कंक्रीट की मजबूती दोगुनी हो गई।
कैसे मजबूत होगा निर्माण : सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर ने बताया कि जब खाद्य अपशिष्ट सड़ता है, तो इससे कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। अगर हम कंक्रीट में बैक्टीरिया और खाद्य अपशिष्ट मिलाते हैं, तो कार्बन डाइ आक्साइड कंक्रीट में मौजूद कैल्शियम आयनों के साथ प्रतिक्रिया करके कैल्शियम कार्बोनेट क्रिस्टल बनाती है। ये क्रिस्टल कंक्रीट में मौजूद छेदों और दरारों को भर देते हैं और वजन पर कोई खास असर डाले बिना कंक्रीट को ठोस बनाते हैं। चौधरी के मुताबिक इस बैक्टीरिया की खासियत यह है कि छेदों और दरारों के भरते ही यह बढ़ना बंद कर देता है जिससे बाद में निर्माण को कोई नुकसान नहीं होता।
रिसर्च में आईआईटी इंदौर के जैव विज्ञान और जैव चिकित्सा इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हेमचंद्र झा भी शामिल थे। उन्होंने बताया कि कंक्रीट में बैक्टीरिया मिलाने के पुराने अनुप्रयोगों में सिंथेटिक रसायनों का उपयोग किया जाता था जिससे यह प्रक्रिया महंगी और कम टिकाऊ हो जाती थी।
झा ने बताया कि आईआईटी इंदौर के अनुसंधान में इस प्रक्रिया की लागत घटाने के लिए सिंथेटिक रसायनों के बजाय खाद्य अपशिष्ट का इस्तेमाल किया गया जो बैक्टीरिया के साथ पानी में घुलकर कंक्रीट में आसानी से मिल जाता है।
Edited By: Navin Rangiyal (भाषा)