गुरुवार को इंदौर में शुरू हुआ भारतीय किसान संघ का आंदोलन एक ही दिन में स्थगित हो गया। प्रशासन द्वारा दिए गए सीएम मोहन यादव से मिलकर चर्चा करने के आश्वासन के बाद किसानों ने फिलहाल आंदोलन खत्म कर दिया है। किसान संगठन के सदस्यों का कहना है कि सीएम से मिलकर भी अगर मांगों पर सहमति नहीं बनी तो फिर से आंदोलन शुरू किया जाएगा, तब तक आंदोलन को स्थगित कर दिया गया है। बता दें कि गुरुवार को हजारों किसानों ने कलेक्टोरेट कार्यालय के सामने पूरी तैयारी के साथ आंदोलन की शुरुआत की थी। लेकिन दूसरे दिन ही किसानों का आंदोलन ठप्प हो गया।
एडीएम से मिला आश्वासन : भारतीय किसान संघ मालवा प्रांत के संभाग अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह ने वेबदुनिया को बताया कि एडीएम रोशन राय ने किसानों से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि एडीएम ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करवाने और सभी मांगों पर चर्चा करवाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि जब तक सीएम से चर्चा नहीं हो जाती तब तक किसी भी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। अंडरपास पर किसानों की सहमति ली जाएगी। इसके साथ ही किसानों को मिलने वाला मुआवजा भी सीएम से चर्चा के बाद ही तय होगा। बता दें कि पिछले कई महीनों से किसान संघ शासन ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चर्चा कर रहा था, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकल सका। इसके बाद किसानों ने गुरुवार को इंदौर में आंदोलन शुरू किया था, हालांकि प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया है।
इन शर्तों धरना स्थगित
- प्रशासन ने दिया मुख्यमंत्री और किसानों के बीच बैठक का आश्वासन।
- ज्वाइंट सर्वे को तत्काल बंद करने की मांग को मान लिया गया।
- रिंग रोड के आसपास मुरम का सर्विस रोड और किसानों की जरूरत के अनुसार बोगदे और अंडरपास बनाने पर सहमति बनी।
- मुआवजा 2 से 4 गुना करने के संबंध में मुख्यमंत्री से बैठक के बाद फैसला लिया जाएगा।
- प्रशासन द्वारा लिखित में आश्वासन दिए जाने के बाद ही किसानों ने धरना प्रदर्शन स्थगित करने का निर्णय लिया।
क्या है हैं किसानों की मांगें?
इन मांगों में इंदौर में पूर्वी और पश्चिमी रिंग रोड निर्माण कार्य के लिए किया जाने वाला जॉइंट सर्वे तत्काल बंद किया जाए।
केंद्रीय भू-अधिग्रहण कानून 2014 को संपूर्ण राज्य में जल्द लागू किया जाए।
पिछले 12 सालों से गाइडलाइन नहीं बढ़ाई गई है, इसे हर साल 25% की दर से बढ़ाया जाए।
बढ़ी हुई गाइडलाइन के आधार पर चार गुना मुआवजा दिया जाए।
आउटर रिंग रोड के लिए जारी किए गए वर्तमान राजपत्र को निरस्त कर गाइडलाइन बढ़ाने के बाद नया राजपत्र जारी किया जाए।
किसी भी जमीन अधिग्रहण योजना में किसानों की सहमति के बिना अधिग्रहण प्रक्रिया आगे न बढ़ाई जाए।
मध्य प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों को भंग किया जाए। किसानों का आरोप है कि आईडीए (इंदौर विकास प्राधिकरण) अपना उद्देश्य भूल चुका है और अब केवल सरकारी भू-माफिया की तरह काम कर रहा है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगों को प्राथमिकता से स्वीकार किया जाए, अन्यथा भारतीय किसान संघ बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा। संघ के प्रचार-प्रसार प्रमुख राहुल मालवीय ने बताया कि प्रदेश और राष्ट्रहित में किसान संघ की मांग है कि मध्य प्रदेश में भूमि अधिग्रहण कानून 2013 को उसके मूल स्वरूप में लागू किया जाए, ताकि संतुलित विकास हो सके।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल