किसी भी इन्दौर निवासी से यदि आप इंदौरीपन की प्रमुख पहचान के बारे में पूछेंगे तो वह नींद में भी यही जवाब देगा कि पोहा-जलेबी, समोसा-कचोरी का नाश्ता और खाने की कई वैराइटियों के साथ लौंग की सेंव का तड़का।
कोई भी इंदौरी इन खाद्य पदार्थों के बिना जीने की कल्पना भी नहीं कर सकता। मगर यह असंभव 'संभव' में बदल सकता है यदि आप मेरी तरह पप्पू भैया के नि:शुल्क दस दिवसीय 'सन टू ह्यूमन मेडीटेशन इंट्रोडक्शन कैंप' में शामिल हों। इसमें सन टू ह्यूमन लिव इन रिलेशनशिप एवं हम और हमारे बच्चे एनर्जी से भरपूर कैसे हों, के बारे में बताया-सिखाया जाता है और प्रायोगिक तौर पर करवाया भी जाता है।
बंगाली चौराहे के पास ईशकृपा गार्डन में 18 दिसंबर से जब यह कैंप आरंभ हुआ तो अपने राम ने यह कह कर दो दिन निकाल दिए कि भई अपन तो नौकरी वाले हैं, समय पर काम पर जाना होता है, फिर ठंड में जल्दी उठते भी नहीं बनता।
अगले दो दिनों तक कैंप की खूब तारीफ सुनी। कॉलोनी के सब लोग अलसुबह नवरात्रि के देवी-दर्शन की तरह गार्डन की तरफ जाते दिखाई दिए तो मन नहीं माना और चौथे दिन अपन भी सपत्नीक इस यज्ञ में शामिल होने चल दिए। हिदायत थी कि यथासंभव ठंडे-ठंडे पानी से नहाकर बिना चाय-बिस्कुट खाए-पिए आना है मगर हम तो बिना नहाए चाय गटक कर कैंप पहुंच गए।
वहां जाकर देखा कि लोग सूर्य की तरफ मुंह कर भरी ठंड में दोनों हाथ ऊपर किए जंपिंग कर रहे हैं ताकि सूर्य की ऊर्जा अपने शरीर में आत्मसात सके। फेफड़ों में अधिकतम ऑक्सीजन पहुंचा कर उन्हें स्वस्थ बना सके। घुटनों के जोड़ों को मजबूत बना सके और साथ ही पैरों के तलुओं का व्यायाम कर सुप्त नाड़ी केन्द्रों को जाग्रत कर सके।
बताया गया कि प्रात: सूर्य के सामने की गई यह जंपिंग हमें दिन भर के लिए चार्ज कर देती है। उसके बाद शुरू हुआ 'अरे जा रे हट नटखट न छेड़ मेरा घूंघट" जैसे कई मधुर गीतों की धुन पर सामुहिक नृत्य। विशाल जनसमूह के हाथ-पैर और कमर मस्ती में थिरक उठे।
सभी इस नृत्य के माध्यम से न केवल उत्तम व्यायाम कर रहे थे बल्कि सूर्य के आशीर्वाद के रूप में और अधिक ऑक्सीजन ले रहे थे और साथ ही अपने शरीर को लचीला भी बनाते हुए आनंद मग्न हो रहे थे।
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मुझे लगा कि रोज सुबह के मेरे बोरिंग मॉर्निंग वॉक से यह व्यायाम अधिक उपयुक्त है। व्यायाम के हर एक्शन के पीछे छुपी लॉजिक को भी समझाया जा रहा था। हाथ ऊपर रखने से हार्ट को खून ऊंचाई पर पहुंचाना पड़ता है इससे वह मजबूत होता है। साथ ही अंगुलियों के माध्यम से शरीर सूर्य-ऊर्जा को जल्दी ग्रहण करता है।
लगातार ताकत के साथ ताली बजाने से हार्ट के वॉल्व मजबूत होते हैं लेकिन जरूरी है कि दोनों हाथों की अंगुलियां आपस में स्पर्श न हों। नृत्य के बाद ऑडियो-वीडियो तथा स्टेज शो के माध्यम से शुरू होता है पप्पू भैया से वार्तालाप।
विभिन्न पौराणिक कथाओं तथा आधुनिक रिसर्च का हवाला देते हुए वह कई उपयोगी जानकारियां प्रदान करते हैं। ऐसी जानकारी जिसके द्वारा आप अपने शरीर को समझ सकते हैं। उसे स्वस्थ, निरोगी व ऊर्जावान बनाने के लिए सम्यक व्यायाम और सम्यक आहार के बारे में जान सकते हैं। पप्पू भैया आहार संबंधी विस्तृत और उपयोगी ज्ञान देते हैं।
उनके अनुसार सम्यक व्यायाम के साथ सम्यक आहार नहीं लिया जाए तो शरीर को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ खास बातें हैं जिनके लिए पप्पू भैया की निश्चित रूप से तारीफ करनी होगी। कैंप हर धर्म के लोगों के लिए खुला है। सूर्य सभी प्राणियों व पेड-पौधों सहित हर इंसान (चाहे वह किसी भी जाति का हो) को अपनी ऊर्जा प्रदान करता है फिर यहां आपस में जातिगत भेदभाव कैसा?
पप्पू भैया कहते हैं कि सिर्फ सूर्य को अपना गुरु मानें और किसी अन्य बाबा, गुरु या महात्मा को बीच में मत आने दीजिए। जिस तरह आप किसी मशीन को जाने बिना उसे चला नहीं सकते उसी तरह अपने शरीर को भी जाने बिना उससे काम लेना गलत है। शरीर रूपी सुपर कंप्यूटर के बारे में अधिक से अधिक जानिए और उसकी देखभाल कीजिए।
माताएं भी इस संबंध में बच्चों को शिक्षित करें। पप्पू भैया के अनुसार हमें हाथ में कोई भी नाड़ा बांधने की जरूरत नहीं और न ही रंगबिरंगे दमकते रत्नों वाली अंगूठियां पहनने की।
नृत्य आयोजन के बाद सम्यक आहार दिया जाता है। सम्यक आहार में दो मौसंबियों के साथ अमरूद, सेब, भीगे मेथीदाने व मूंगफली दाने, अलसी, कच्ची लौकी, गुड, पिंडखजूर और ताजी छौंक लगाई हुई छाछ का नाश्ता दिया जाता है।
कैंप में बताई गई कई बातों व एलोपैथी-अन्य पैथियों के डॉक्टरों के विचारों के मध्य विरोधाभास हो सकता है। अत: जरूरी है कि किसी भी व्यायाम या आहार को अपनाने के पहले अपने डाक्टर से भी सलाह कर अच्छी तरह से सोच लें कि आपके शरीर को वह सूट करता है या नहीं। पप्पू भैया स्वयं कहते हैं कि उनकी बताई हर बात को क्यों-क्या और कैसे की कसौटी पर स्वयं परख कर ही अपनाया जाए।
कैंप में पर्यावरण संरक्षण का विशेष ध्यान रखते हुए सभी लोगों को नाश्ते के लिए अपने साथ प्लेट, कटोरी, ग्लास तथा चाकू लाना अनिवार्य होता है ताकि प्लास्टिक डिस्पोजल्स का उपयोग न करना पड़े। पुराने जमाने के सामुहिक भोज की तरह लोग इन्हें बिना शर्म अपने साथ ला भी रहें हैं।
कहने की जरूरत नहीं कि अगले दिन से मेरी चाय बिलकुल बंद हो गई। सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान का क्रम सम्यक व्यायाम व आहार के साथ शुरू हो गया। सिर्फ दो ही दिनों में महंगाई सी ऊंचाई पर चल रहा मेरा ब्लड-शुगर लेवल सेंसेक्स की तरह गिरकर नीचे आ गया।
धन्यवाद पप्पू भैया लेते नहीं, कहते हैं कि सूर्यदेव को दे दो अत: उन्हें और उनके साथियों को इस अभिनव प्रयास के लिए शुभकामनाएं।
इंदौरीपन की पहचान मगर अस्वाथ्यकर जलेबी-पोहा-समोसा-कचोरी-सेंव को मैंने बॉय-बॉय जरूर कह दिया है मगर यदा-कदा मिलने का ऑप्शन खुला है, आखिर इंदौरी हूं ना। आगामी कैंप 13 जनवरी से नगर निगम उद्यान, दशहरा मैदान में आयोजित है। पूर्व आयोजित कैंप की सीडी सशुल्क उपलब्ध है।