Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

10 मार्च : सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि आज, जानें भारत की प्रथम महिला शिक्षिका के बारे में 10 विशेष बातें

हमें फॉलो करें 10 मार्च : सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि आज, जानें भारत की प्रथम महिला शिक्षिका के बारे में 10 विशेष बातें
Savitribai Phule : जन्म- 3 जनवरी, 1831, मृत्यु- 10 मार्च, 1897
 
सावित्रीबाई फुले (savitribai phule) को महिलाओं की शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने वाली भारत की पहली महिला शिक्षक कहा जाता है। जिन्होंने महिलाओं को शिक्षित तथा सशक्त करने के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए। भारतीय इतिहास में उनका विशेष स्थान है। 
 
आइए जानते हैं सावित्रीबाई फुले के बारे में 10 खास बातें-
 
1. आज सावित्री बाई फुले की पुण्यतिथि है। सावित्री बाई फुले भारतीय इतिहास में वह खास शख्सियत हैं, जिन्होंने समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। सावित्री बाई फुले (Savitribai Phule) एक कवयित्री, महान समाज सुधारक और भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं। उन्होंने महिलाओं को शिक्षित करने की दिशा में बहुत कार्य किए। 
 
2. सावित्री बाई फुले का जन्म महाराष्ट्र के एक किसान परिवार में 3 जनवरी 1831 को हुआ था। सावित्री बाई फुले के पिता का नाम खंडोजी नेवसे और माता का नाम लक्ष्मीबाई था। 
 
3. उन्होंने महात्मा ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर सन् 1848 में बालिकाओं के लिए एक विद्यालय की स्थापना की उनके पति ज्योतिबा भी समाजसेवी थे।  
 
4. सन् 1840 में मात्र 9 वर्ष की उम्र में सावित्री बाई फुले का विवाह 12 वर्ष के ज्योतिराव फुले के साथ हुआ, वे बहुत बुद्धिमान, क्रांतिकारी, भारतीय विचारक, समाजसेवी, लेखक एवं महान दार्शनिक थे। उन्होंने अपना अध्ययन मराठी भाषा में किया था। 
 
5. महिला अधिकार के लिए संघर्ष करके सावित्री बाई ने जहां विधवाओं के लिए एक केंद्र की स्थापना की, वहीं उनके पुनर्विवाह को लेकर भी प्रोत्साहित किया। 
 
6. उस समय जब लड़कियों की शिक्षा पर सामाजिक पाबंदी बनी हुई थी, तब सावित्री बाई और ज्योतिराव ने वर्ष 1848 मात्र 9 विद्यार्थियों को लेकर एक स्कूल की शुरुआत की थी। 
 
7. सावित्री बाई और ज्योतिराव फुले की कोई संतान नहीं हुई। अत: उन्होंने एक ब्राह्मण विधवा के पुत्र यशवंत राव को गोद लिया था, जिसका उनके परिवार में काफी विरोध हुआ तब उन्होंने परिवार वालों से अपने सभी संबंध समाप्त कर लिया। 
 
8. उस जमाने में गांवों में कुंए पर पानी लेने के लिए दलितों और नीच जाति के लोगों का जाना उचित नहीं माना जाता था, यह बात उन्हें बहुत परेशान करती थी, अत: उन्होंने दलितों के लिए एक कुंए का निर्माण किया, ताकि वे लोग आसानी से पानी ले सकें। उनके इस कार्य का खूब विरोध भी हुआ, लेकिन सावित्री बाई ने अछूतों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने का अपना कार्य जारी रखा।
 
9. फुले दंपति को महिला शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए सन् 1852 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने सम्मानित किया था, सावित्री बाई के सम्मान में डाक टिकट तथा केंद्र और महाराष्ट्र सरकार ने उनकी स्मृति में कई पुरस्कारों की स्थापना की है।
 
10. सावित्री बाई फुले का पुणे में लोगों का प्लेग के दौरान इलाज करते समय वे स्वयं भी प्लेग से पीड़ित हो गईं और उसी दौरान 10 मार्च 1897 को उनका निधन हो गया था। सावित्री बाई फुले भारत की ऐसी महान हस्त‍ी तथा पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्हें दलित लड़कियों को पढ़ाने पर लोगों द्वारा फेकें गए पत्थर और कीचड़ का सामना भी करना पड़ा।

webdunia
Savitribai Phule

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

राकेश शर्मा को पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान