Desi Quilt of Karauli: इन दिनों पूरे भारत में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है लोग अलग-अलग तरीके से सर्दी से बचने का प्रयास करते हैं। कहीं अलाव जलाया जाता है तो कहीं रूम हीटर से सर्दी को भगाने की कोशिश की जाती है। लोग एक के ऊपर एक कई रजाई कंबल ओढ़ कर सर्दी से बचने की जुगत लगते हैं। राजस्थान के करौली जिले में एक ऐसी खास रजाई बनाई जाती है, जो सर्दी के मौसम में लोगों के लिए वरदान साबित होती है। इस रजाई की गर्माहट इतनी ज्यादा होती है कि रूम हीटर और मखमली कंबल भी इसके आगे फेल हो जाते हैं। ये रजाई ओढ़ते ही आपको गर्मियों का एहसास होने लगेगा। आइए इस लेख में आपको इस जादुई रजाई के बारे में और जानकारी देते हैं।
करौली की रजाई: एक पारंपरिक विरासत
करौली की यह रजाई सदियों से यहां की पारंपरिक विरासत रही है। इस रजाई को बनाने का काम महिलाएं करती हैं। वे पूरी लगन और मेहनत से इस रजाई को तैयार करती हैं। इस रजाई को बनाने में स्थानीय रूप से उपलब्ध कपास का उपयोग किया जाता है।
क्या है इस रजाई की खासियत?
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गर्मी: इस रजाई की सबसे बड़ी खासियत इसकी गर्माहट है। यह रजाई इतनी गर्म होती है कि सर्दी के मौसम में आपको बिल्कुल भी ठंड महसूस नहीं होगी।
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हल्की: यह रजाई काफी हल्की होती है, जिससे इसे ओढ़ना बहुत आसान होता है।
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टिकाऊ: यह रजाई काफी टिकाऊ होती है और लंबे समय तक चलती है।
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स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद: इस रजाई में इस्तेमाल होने वाला कपास प्राकृतिक होता है, इसलिए यह त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है।
रजाई बनाने की प्रक्रिया
इस रजाई को बनाने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। सबसे पहले कपास को काटा जाता है और फिर उसे धोया जाता है। इसके बाद कपास को सूर्य की रोशनी में सुखाया जाता है। सूखने के बाद कपास को कताई करके धागा बनाया जाता है। इस धागे से कपड़ा बुना जाता है। इस कपड़े से रजाई बनाई जाती है।
करौली में रजाई का कारोबार सदियों पुराना है। सर्दी के मौसम में इस रजाई की मांग काफी बढ़ जाती है। लोग दूर-दूर से इस रजाई को खरीदने के लिए आते हैं। करौली की रजाई एक अनूठी और पारंपरिक विरासत है। यह रजाई न केवल सर्दी से बचाती है बल्कि यह हमारे पारंपरिक शिल्प का भी एक उदाहरण है। अगर आप सर्दियों में गर्म रहना चाहते हैं तो करौली की इस जादुई रजाई को जरूर खरीदें।