आठ सवाल और उनके जवाब, आपका दिमाग भी हिला देंगे...

जब से दुनिया में अदालतें बनी हैं तब से कोर्ट्‍स में निपटाने के लिए ऐसे मामले सामने आते रहे हैं कि आम लोगों द्वारा यह तय करना मुश्किल हो गया कि क्या सही है और क्या गलत? ऐसे में कोर्ट की मदद से ली गई और अदालतों ने भी ऐसे फैसले सुनाए कि लोगों के आश्चर्य की सीमा न रही।  
 
इसलिए जब आपके दोस्तों और आपके बीच विवाद की स्थिति बने तो आप कोर्ट को सोते से जगाइए क्योंकि हो सकता है कि आपको यहां सही जवाब मिल जाए। आपको यह भी संतोष होगा कि कोर्ट का फैसला पूरी तरह कानून सम्मत है और पूरी तरह से वास्तविक भी।
 
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में एक मामला आया जिसमें यह तय करना था कि टमाटर फल है या सब्जी?
इस मामले में वनस्पति विज्ञानियों का कहना था कि टमाटर एक फल है क्योंकि यह अन्य फलों की तरह से पौधे के बीज रखता है, यह पौधों के फूलों के गर्भाशय से निकलता है और इस कारण से यह फल है। 
 
लेकिन यह तर्क अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की समझ में नहीं आया। विदित हो कि न्यूयॉर्क के निक्स बनाम हेडन के मामले में कोर्ट को यह तय करना था। शहर का एक सब्जी विक्रेता जॉन निक्स का तर्क था कि उसके टमाटरों पर सब्जी के तौर पर लगने वाला कर नहीं लग सकता क्योंकि टमाटर फल हैं सब्जी नहीं। 
 
लेकिन सरकार को निक्स का यह तर्क ठीक नहीं लगा और कोर्ट ने फैसला सुनाया हालांकि तकनीकी रूप से टमाटर एक फल है लेकिन फिर भी इस पर टैक्स लगेगा क्योंकि ज्यादातर लोग सब्जी ही मानते हैं। इसलिए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि टमाटर एक सब्जी है, फल नहीं। इसलिए निक्स को सब्जी पर लगने वाला कर चुकाना चाहिए। 
 
क्या भुतहा घर वास्तविक हैं? 
वर्ष 1989 में जेफ्री स्ट्राम्बोवस्की ने न्यूयॉर्क में हेलन ऑक्ली से एक घर खरीदा लेकिन बाद में वह जानकर हैरान रह गया कि हेलन ने अपने पिछले बारह वर्षों के दौरान लोगों को यह बताने में बिताए कि उसका घर भुतहा है। हेलन ने अपने घर के बारे में रीडर्स डाइजेस्ट में लिखा और एक स्‍थानीय समाचार पत्र ने हेलन की भूत प्रेत की कहानियां छापीं।
 
हेलन का कहना था कि भूत उसके घर में तमाम तरह के उपहार छोड़ जाते हैं और जब उसकी बेटी को स्कूल के लिए जगाना होता था तो प्रेत लड़की के बिस्तर को हिला देते थे। तब हालांकि लोग भूत प्रेत की इन कहानियों पर विश्वास करते थे लेकिन इसी बात को आधार बनाकर स्टामबोवस्की ने मुकदमा दायर कर दिया कि हेलन को यह बात मकान की खरीदी से पहले उसे बतानी चाहिए थी। 
 
उसका कहना था कि इसके चलते हेलन को मकान की ज्यादा रकम मिली। लेकिन हेलन का तर्क था कि उसकी ऐसी कोई जिम्मेदारी नहीं थी और मकान बहुत पुराना था और भूत प्रेत वास्तव में होते ही नहीं हैं। आक्ली के जवाब ने मामले का कोर्ट को जल्दी फैसला लेने को विवश कर दिया।  
 
तब कोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिहाज से घर पूरी तरह से भुतहा था। इसका एक अर्थ यह भी है कि कोर्ट ने मान लिया कि भूत-प्रेत भी होते हैं। 
 
क्या बोलने वाले किसी जानवर की गवाही कोर्ट में मान्य है ?
कोर्ट में एक मामला आया कि जज को यह तय करना था कि लोग सहीं हैं या झाड़फूंक करने वाले। वर्ष 1993 में गैरी जोसेफ रास्प की हत्या के मामले में बचाव पक्ष के वकील ने पीड़ित के अफ्रीकी ग्रे तोते मैक्स की गवाही को मान्य करने का अनुरोध किया। 
 
बचाव पक्ष का कहना था कि हत्या के समय मैक्स घटनास्थल पर मौजूद था और बाद में उसने किसी को चिल्लाते सुना था, 'रिचर्ड नो, नो नो।' लेकिन आरोपित का नाम रिचर्ड नहीं था इसलिए उनका दावा था कि उसने हत्या नहीं की है। हालांकि कानून की किताबों कहीं नहीं लिखा कि गवाह कोई आदमी ही होना चाहिए।  
 
लेकिन जज का कहना था कि मैक्स की गवाही को गवाह के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि बोलने वाले पशु पक्षी गवाह नहीं हो सकते क्योंकि असली जिंदगी कोई कार्टून नहीं है।
 
एक प्रिंगल क्या है ? 
ब्रिटेन में कुछ विशेष स्नैक फूड्स जैसे क्रिस्प या अमेरिका में पॉटेटो चिप्स पर वैल्यू एडेड टैक्स लगाया जाता है। इसलिए प्रिंगल्स के निर्माताओं, प्रॉक्टर एंड गैम्बल्स का तर्क था कि उनका उत्पाद तो बिल्कुल भी क्रिस्प नहीं है। उनका कहना था कि उनका उत्पाद 50 फीसदी आलू से भी कम में बनाया जाता है। इसलिए प्रिंगल्स पर टैक्स नहीं लगना चाहिए। 
 
उनका यह भी दावा था कि वे क्रिस्प से कम और ज्यादातर बिस्किट (जिन्हें अमेरिका में कुकीज कहा जाता है) जैसे हैं लेकिन ब्रिटेन के रेवेन्यू एंड कस्टम्स ने प्रॉक्टर एंड गैम्बल्स के तर्कों को अनसुना कर दिया और कहा कि आलू की बजाय आलू के फिलर से बनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि कंपनी को टैक्स चुकाने से छूट मिल जाए। 
 
लेकिन 2008 में प्रॉक्टर एंड गैम्बल के पक्ष में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया और यह भी बताया कि प्रिंगल क्या है? पर सरकार ने कोर्ट ऑफ अपील्स में हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील कर दी और अंत में प्रॉक्टर एंड गैम्बल को टैक्स चुकाना पड़ा। कोर्ट का फैसला था कि प्रिंगल्स स्वादिस्ट होते हैं और इतने क्रिस्प कि इन पर टैक्स लगाया जाए।
 
अपराध से हासिल कमाई भी कर योग्य है? 
यूजीन जेम्स एक लेबर यूनियन का कर्मचारी था जिसने गबन करके 738,000 कमाए थे। आमतौर पर अपराधी ऐसे ही कमाई करते हैं लेकिन उसने इस रकम को कर योग्य नहीं बताया। ब्रिटेन की रेवेन्यू सर्विस को इस बात से कोई लेना देना नहीं होता है आपने कमाई कैसे की है और आपने चोरी की है या डाका डाला है।
 
जेम्स पर कर चोरी का मुकदमा चला और उसने बचाव में तर्क दिया कि अपराधों से की गई कमाई पर आयकर नहीं लगता है। जबकि अमेरिका में लोन के तौर जिस पैसे को अंतत: किसी को चुकाना होता है, उसे कर योग्य नहीं माना जाता है। जेम्स का कहना था कि चूंकि उसने पैसे चोरी किए थे और उसे यह राशि सरकार को वापस करनी थी इसलिए उस पर कोई टैक्स नहीं लगना चाहिए। 
 
लेकिन टैक्स कर्मचारी इस तर्क से प्रभावित नहीं हुआ कि केवल कानूनी तरीकों कमाए गए पैसों पर ही टैक्स लगता है। अंतत: मामला अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक आय भी आय ही है, इसलिए जेम्स को चोरी के पैसों पर भी कर चुकाना चाहिए। कोर्ट का कहना था कि पैसे भले ही चोरी से हासिल किए हों लेकिन टैक्स आपको इमानदारी से चुकाना चाहिए।
तीन सवालों के जवाब जानें अगले पेज पर... 
 

आसमान का मालिक कौन है? 
वर्ष 1946 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में एक मामला आया जो कि अमेरिकी सरकार बनाम कॉस्बी का था। आम तौर पर एक विचार को मान्यता थी कि अगर आप जमीन के मालिक हैं तो जमीन के ऊपर की प्रत्येक चीज आपकी है। 
 
इसी कानून के आधार पर कॉस्बी ने अमेरिकी सरकार पर मुकदमा दायर किया था। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी सेना एक ऐसी हवाई पट्टी का उपयोग करती थी जो कि चिकन फार्म से मील से कम दूरी पर थी। कभी कभी विमान इतने नीचे उड़ते थे कि डर के मारे चिकन्स आत्महत्या करने लगे। 
 
कॉस्बी ने एड केलम कानून का हवाला दिया और कहा कि उसके फार्म के ऊपर का आसमान उसका है, इसलिए उसे चिकन्स की मौत की क्षतिपूर्ति दी जाए लेकिन सरकार का कहना था कि 1926 के एयर कॉमर्स एक्ट के अनुसार समूचे एयरस्पेस की वही मालिक है। 
 
सुप्रीम कोर्ट ने एक समझौते जैसा फैसला सुनाया। कोर्ट का कहना था कि आपकी जमीन के ऊपर का आसमान आपका है लेकिन यह एयरस्पेस केवल इसकी निचली ऊंचाई का भाग और समूचा आसमान तो निश्चित तौर पर किसी का नहीं है। 
 
गॉल्फ क्या है? 
खेलों के नियमों को लेकर लोग अक्सर ही विरोध दर्ज कराते हैं लेकिन क्या आपका वाद-विवाद इतना बढ़ जाता है कि मामला कोर्ट तक चला जाए। और इतना तो पक्का है कि ऐसे मामले सुप्रीम कोर्ट में नहीं पहुंचते हैं लेकिन आप इस खबर को पढ़ने के बाद अपने विचार बदलने को मजबूर हो जाएंगे।   
 
कैसी मार्टिन एक गॉल्फर थे जो कि पीजीए (प्रोफेशनल गॉल्फ प्रतियोगिता) में भाग लेने का इरादा रखते थे लेकिन चिकित्सा संबंधी स्थिति के चलते वे चलने -फिरने से लाचार थे। इसलिए उन्होंने पीजीए टुअर कमेटी से कहा कि वे प्रतियोगिता के दौरान होल्स तक पहुंचने के लिए गॉल्फ कार्ट का इस्तेमाल करने की इजाजत चाहते हैं।
 
लेकिन खेल आयोजकों का कहना था कि होल्स के बीच चलना खेल का एक अभिन्न हिस्सा है और उन्हें ऐसा करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। खेल आयोजकों के इस फैसले से नाराज मार्टिन उन पर मुकदमा शुरू करवा दिया और दावा किया कि पीजीए टुअर आयोजकों को अमेरिका के विकलांगता कानूनों को ध्यान में रखते हुए उन्हें इसकी अनुमति देनी चाहिए। 
 
जब दोनों पक्षों के तर्क-वितर्कों से मामला नहीं सुलझा तो मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। कोर्ट ने खेल आयोजकों के तर्क को गलत बताया और कहा कि गॉल्फ कार्ट का इस्तेमाल किसी प्रकार की धोखाधड़ी है। अंतत: सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मार्टिन को कार्ट का प्रयोग करने की इजाजत दे दी गई वे प्रतियोगिता के अगले दौर के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए। कोर्ट का फैसला था कि गॉल्फ के मुकाबलों में पैदल चलना खेल का हिस्सा नहीं है।
 
क्या एक्स-मेन मनुष्य हैं? 
वर्ष 2000 के शुरुआत में एक्स मेन नामक एक्शन हीरोज के निर्माता मार्वल कॉमिक्स की शाखा, टॉय बिज, अपने आयातित खिलौनों पर चुकाई जाने वाले टैक्स की दरों को कम कराने के तरीके खोज रही थी। जबकि उन्हें मनुष्य जैसे दिखने वाले खिलौने के अन्य आयातकों की तरह से टैक्स चुकाना पड़ रहा था। उन्हें भी उतना ही टैक्स देना पड़ रहा था जितना कि डॉल्स के आयातकों को।
 
पर उन्हें पता चला कि जो खिलौने गैर-मानवों जैसे प्राणियों की तरह दिखते हैं, उनपर टैक्स की दर कुछ कम है। इस कारण से टॉयबिज ने इंटरनेशनल ट्रेड के अमेरिकी कोर्ट में कहा कि उनके खिलौने-एक्स मेन और द अवेंजर्स-मनुष्य नहीं हैं इसलिए उनपर कम कर लगाया जाए। इसलिए टॉय बिज के 60 से ज्यादा खिलौनों की समीक्षा करने या फिर इनसे खेलने के बाद कोर्ट ये खिलौने 'गैर मनुष्यों की शक्ल वाले खिलौने' हैं। 
 
जब टॉय बिज और मार्वल कंपनी कोर्ट में अपनी जीत का जश्न ही मना रहे थे कि कंपनी को आलोचकों के एक और वर्ग से सामना करना पड़ा। ये लोग मार्वल्स के प्रशंसक थे। विदित हो कि वर्षों तक मार्वल की कहानियों ने लोगों को समझाया था कि एक्स मेन की तरह की म्यूटेंट्‍स को अन्य लोगों की तरह ही मनुष्य समझा जाए। प्रशंसकों को यह बात नागवार लगी कि मार्वल अपने उत्पादों को कानूनी तौर पर गैर ह्यूमन (मनुष्य) घोषित करने को कहे।  
 
इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि म्यूटेंट्स और एक्स मैन व अन्य पात्र गैर ह्यूमन नहीं हैं और कंपनी को इस फैसले के अनुरूप ही टैक्स देना होगा।    

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