Publish Date: Mon, 15 May 2017 (20:59 IST)
Updated Date: Mon, 15 May 2017 (21:03 IST)
बीजिंग। केकड़े के खोलों और चांदी के सुक्ष्मकणों से तैयार स्प्रे से मलेरिया के वाहक मच्छरों के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है। यह कहना है इस पर्यावरण अनुकूल मिश्रण का भारत में सफलतापूर्वक परीक्षण करने वाले वैज्ञानिकों का।
नेशनल ताईवान ओशन यूनिवर्सिटी के जियांग शियो हवांग ने कहा कि इस घोल को कम मात्रा में मलेरिया के वाहक, एनोफीलीस सनडाइकस मच्छर की आबादी पर प्रभावी तरीके से अंकुश के लिये इस्तेमाल किया जा सकता है जबकि इसका गोल्डफिश जैसे मच्छरों के प्राकृतिक दुश्मनों पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता।
शोधकर्ताओं में तमिलनाडु के भारतियार विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ भी शामिल थे। उन्होंने गैस विषाक्त प्राकृतिक पदार्थ चिटोसान या चिटिन को लिया जिसका इस्तेमाल घावों के उपचार और जैविक तरीके से नष्ट होने वाली खाद्य पदाथरें की पैकेज कोटिंग के लिये किया जाता है।
शोधकर्ताओं ने कहा कि चिटिन जानवरों के उत्तकों जैसे संधिपाद प्राणियों के बाह्य कंकाल, पक्षियों की चोंच और कीड़ों के अंडों में पाया जाता है।
इसे आसानी से रसायनिक रूप से बदला जा सकता है, यह बेहद प्रभावी और प्रकृति में प्रचूर मात्रा में उपलब्ध है इसलिये इस्तेमाल में मूल्य प्रभावी भी है। शोधकर्ताओं ने पहले कई केकड़ों के बाह्य कंकाल का चूरा बनाया और उसे सुखाया जिसके बाद उसमें से चिटिन और अन्य खनिज पदार्थ निकाले।
इसके बाद इसे छानने के बाद मिले सफेद से पदार्थ को सिल्वर नाइट्रेट के साथ मिलाया गया जिससे सिल्वर सूक्ष्मकणों का भूरा-पीला घोल मिला। इस घोल को कोयंबटूर में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कम्यूनिकेबल डीसीजेज में पानी के छ: बांधों पर छिड़का गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि इसकी कम मात्रा के बावजूद यह बेहद प्रभावी तरीके से मच्छरों के लार्वा और प्यूपा को मारने में कारगर रहा। (भाषा)
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Publish Date: Mon, 15 May 2017 (20:59 IST)
Updated Date: Mon, 15 May 2017 (21:03 IST)