Publish Date: Tue, 17 Jul 2018 (17:46 IST)
Updated Date: Tue, 17 Jul 2018 (17:59 IST)
नई दिल्ली। ट्रंप सरकार की तरफ से वीजा नियमों में सख्ती के बीच अमेरिका में बसने और कारोबार करने की इच्छा रखने वाले भारतीयों में वहां के ईबी-5 वीजा कार्यक्रम की तरफ आकर्षण बढ़ रहा है। यह जानकारी इस तरह के कार्यक्रम से जूड़ी एक वित्तीय सेवा फर्म ने दी है।
ईबी-5 वीजा कार्यक्रम के तहत, ग्रीन कार्ड पाने के लिए व्यक्ति को किसी योजना में 5 लाख से 10 लाख डॉलर के बीच निवेश करना होता है, जो कि कम से कम 10 नौकरियां सृजित करे सके। यह विदेशी नागरिकों और उनके परिवार (उनके 21 वर्ष तक के बच्चे) को ग्रीन कार्ड और स्थायी निवास उपलब्ध कराता है।
अमेरिकी वीजा कार्यक्रम से जुड़े रीजनल सेंटर कैनएम इन्वेस्टर सर्विसेज के भारत और पश्चिम एशिया के उपाध्यक्ष अभिनव लोहिया ने कहा कि कैनएम को 2016 में ईबी-5 50 निवेशक प्राप्त हुए जो कि 2017 में बढ़कर 97 हो गए और इस वर्ष इसके 200 तक पहुंचने की उम्मीद है।
उनका अनुमान है कि 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) में ईबी-5 वीजा के लिए आवेदन करने वाले भारतीयों की कुल संख्या बढ़कर 700 से भी अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वीजा के लिए आवेदन करने वाले भारतीयों में सबसे ज्यादा आवेदक मुंबई, दिल्ली और बेंगलूरू के होते हैं तथा निवेश के सबसे अधिक प्रस्ताव जमीन जायदाद क्षेत्र से संबंधित होते हैं।
कंपनी की एक विज्ञप्ति के अनुसार भारत से वित्त वर्ष 2016-17 में ईबी-5 वीजा के लिए 500 से अधिक आवेदन किए गए थे। यह एक साल पहले की तुलना में 222 प्रतिशत अधिक है। 2015-16 और 2014-15 में अमेरिकी सरकार को क्रमश: 354 और 239 भारतीयों के आवेदन मिले।
लोहिया ने कहा कि ईबी-5 आवेदनों की संख्या तेजी से बढ़ने की दो वजह हैं। पहला ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1बी पर नई नीति लाने के संकेत और दूसरा ईबी-5 वीजा के तहत निवेश की राशि 5 लाख डॉलर से बढ़ाकर 9,25,000 डॉलर किए जाने की संभावना।
ईबी-5 वीजा के लिए आवेदन करने वालों की संख्या के लिहाज से भारत तीसरा सबसे बड़ा देश है। जल्द ही उसके दूसरे पायदान पर पहुंचने की संभावना है। वर्तमान में पहले स्थान पर चीन और दूसरे पर वियतनाम है।